प्रथम भाव मे शुक्र होने पर जातक सुन्दर औऱ गुणों से भरपूर होता है, शुक्र भौतिक सुखो का दाता है, इसलिए सभी तरह के सुख जातक के पास होते है, शुक्र दैत्यों के गुरु है इसकारण दैत्य सामान कु बुद्धि जातक के पास अधिक होती है, जातक शारब, कबाब आदि से कभी परहेज नहीँ करता |
जातक कलात्मक चीजों मे अत्यधिक रूचि रखता है, औऱ सुन्दर परिधान तथा सजाने सवारने वाले कामों से जुड़ाव रखता है,
अपनी छवि राजा के सामान दुसरो के पास प्रदर्शित करता है, ऐसे जातक थोड़े भोग बिलासी परिविरति के होते है, औऱ शुक्र लग्न भाव मे होने के कारण विपरीत योनि के प्रति विशेष झुकाव रखते है |
यदि शुक्र की महादशा या शुक्र की अन्तर्दशा चल रही हो, तो चरित्र से जुडी गंभीर आरोपों का भी सामना करना पड़ सकता है,
ऐसे जातक जरा मनमौजी होते है, औऱ किसी भी कार्य को पूरी दछता से पूर्ण करने की योग्यता रखते है, काम के प्रति इनका विशेष आकर्षण देखा गया है, औऱ इन्हे काम सुखो के लिए ज्यादा चेस्टा भी नहीँ करना पड़ता है,