ग्रहो की युति प्रतियुति से लाभ हानि

कभी कभी देखा जाता है, कुंडली मे एक ही घर मे कई गृह विराजमान हो जाते है, दो ग्रहो के मेल को युति तथा तीन या इससे अधिक ग्रह प्रतियुति कहलाते है,

कुंडली पूरी तरह से 360° का होता है, इसलिए प्रत्येक भाव 30° का प्रभाव रखता है, अगर कोई गृह किसी भाव मे अकेला विराजमान है तो वाह अच्छा या बुरा अपना 30° का प्रभाव देगा,

जबकि दो ग्रहो के मेल से दोनों गृह अपने आधे आधे पभाव ही दे पाएंगे जैसे – किसी कुंडली मे चौथे भाव मे शुक्र औऱ बुद्ध विराजमान है तो दोनों का अपना 15°, 15° का योग देंगे, जबकि इनदोनो ग्रहो का मेल अच्छे फल ही देंगे,

इसी प्रकार कभी कभी बुरे ग्रहो का मेल शुभ भावों मे हो जाते है जिससे जातक को काफी समस्याओ का सामना करना पड़ जाता है,

अच्छे ग्रहो की युति या प्रतियुति अच्छे फल देते है जबकि बुरे ग्रहो की युति अथवा बुरे ग्रहो की प्रतियुति बुरे फल देते है,

किसी किसी की कुंडली मे ऐसा भी देखा जाता है की अच्छी औऱ बुरी दोनों तरह की युति या प्रतियुति बन रही है, तब अशुभ गृह प्रतियुति जातक को बुरे कार्यों मे लीप्त करना चाहेंगे, जबकि अच्छे ग्रहो की प्रतियुति जातक को ख़ास मौक़े पे रोक लेंगे,

अच्छे ग्रहो के मेल जातक के अंदर शुभता देंगे, जबकि बुरे ग्रहो की युति जातक कों गलत मार्ग प्रसस्त करेंगे, जैसे – कुसी कुंडली मे मंगल शुक्र की युति बन रही हो औऱ उसी कुंडली मे सूर्य गुरु की युति बन रही हो.. तो जब जब मंगल शुक्र युति जातक को मुशीबत मे डालती है तब सूर्यगुरु युति उसे उस मुशीबत से बाहर निकलती है, |

कहने का अर्थ है, बुरे ग्रहो से अच्छे ग्रह जातक के सदैव रक्षा करते है, अंततः जातक शुभ मार्ग पर अधिक होता है |”””

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