पंचम भाव मे शुक्र

पंचम भाव मे शुक्र होने पर जातक किसी कवि की तरह अपने आशावादी जीवन मे खोया रहता है, जातक सजावटी संसार के प्रति अपने आप आप मे टान महसूस करता है, बोलने की कला मे माहिर होता है, !””

खुद को सजा स्वर कर पेश करना जातक को अच्छा लगता है, शुक्र यदि पंचम भाव मे हो तो जातक को एक कन्या पुत्री अवश्य होती है, औऱ शुक्र की महादशा मे पुत्री द्वारा जातक को काफी ऐशो आराम का सुख व मिलता है, |

ऐसे जातक जब तक अपनी आँखों से होता हुआ ना देख ले, उन्हें दुनिया मे सारे चमत्कार ढकोशला ही प्रतीत होते है,,… “!

कभी कभी देखा जाता है की काफी काम आयु मे संसार के प्रति जातक को विरक्ति आ जाती है, किसी से मोह माया नाम मात्र रह जाता है,

कम्प्यूटर, तथा शुक्र से सम्बंधित वस्तुए को खरीद बेचकर भी ऐसे लोग धन्यवाद कमाते है, !”इन्हे भाफवन से अधिक अपने कलाकार मन पर विश्वास होता है,

इसतरह के जातक उम्र के आखिरी पड़ाव मे आकर काफी कुछ गवा बैठते, तथा धनहीन जीवनसाथी ब्यतीत करते है, उनकी अवलाद पारिवारिक सुख से ज्यादातर भौतिक सुखो की ओर भागते देखे जाते है, जिसकारण जातक समय से पहले सारे रिश्ते नातो से मुंह फेर लेता है !!””

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