हेलो दोस्तों, कुंडली मे आपलोगो ने देखा होगा की शुक्र ग्रह बेहद खास रोल अदा करती hai, हमारी जितनी भी इच्छाएं है सभी को शुक्र ग्रह ही पूरी तरह से परिपूर्ण करती है ! हलाकि यह एक दानव ग्रह है परन्तु जीवन ही सुख सुविधा को देने मे इसका हाथ भी कहा गया है, यह वास्तव मे वीर्य का कारक है, इस ग्रह का नाम देवगुरु शुक्राचार्य के नाम से पड़ा ऐसा तो आप सभी जानते ही होंगे, तो आइये जानते है शुक्र ग्रह से जुडी कुछ रोचक तथ्य :
शुक्र ग्रह की कुंडली मे उपस्थिति :
1.कुंडली मे जब शुक्र मेष राशि अर्थात पहले घर मे होता है तब जातक थोड़ा आशिक मिजाज होता है हलाकि उसे पैसे की कोई कमी नहीं होती परन्तु समय समय पर उसके चरित्र पर कोई ना कोई सवाल उठते ही रहते हैं, शुक्र की महादशा या अन्तर्दशा मे इन्हे सावधानी बरतनी चाहिए, ऐसे समय मे ये लोग दुसरो के प्रेमजाल ने आसानी से फंस सकते है !
2.कुंडली मे जब शुक्र अपने घर मतलब बृषभ राशि मे होता है तब यह अच्छा परिणाम देता है, तथा वहा बैठकर ये द्विगबली हो जाता है जिसकारण जातक या जातिका को एक रूपवान अथवा सुन्दर नयन नक्श वाली पत्नी मिलती है. !
3.शुक्र ग्रह जब कुंडली के तीसरे घर मे बैठता है तो उस घर को प्रभावशाली बना देता है, परन्तु तीसरा घर मेहनत का घर है इसलिए जातक को अपनी पत्नी को ख़ुश रखने या विवाह करने मे अधिक मेहनत करना पड़ता है , शुक्र था बुद्ध की युति अपने आप मे बेहद खास है साथ साथ यह धनयोग व देता है !
4.चौथा घर चन्द्रमा का होता है, अर्थात माता का जो जातक को धन्यवाद दौलत भवन गाड़ी तथा सभी भौतिक सुखो की प्राप्ति करवाता है, इस घर मे दुस्ट ग्रह जैसे राहु केतु होने पर माता के स्वास्थ्य मे थोड़ी कमी अति है या ऐसा व देखा गया है की जातक का माता के साथ बनती ही नहीं है, परन्तु यह घर सुख ही सुख देता है इसलिए इसे जागृत करे , जिसके लिए आपको अपनी माता से सम्भन्ध अच्छे रखने होंगे तथा थोड़ी सेवा करने से भी बेहतर परिणाम मिलेंगे, इस घर मे शुक्र ग्रह बेहद शुभ मना गया है !
5.पांचवा घर संतान तथा आय का होता है, इस घर मे शुक्र का होना ये बताता है की भविष्य मे आपको एक अच्छी पुत्री मिलेगी !
6.छठा घर वैसे तो अच्छा नहीं माना गया है परन्तु इस घर के स्वामी स्वयं बुद्ध अर्थात गणेश जी है जिसकारण शुक्र और बुद्ध की इस्तिथि अच्छी मानी जाती है इनसे धनयोग बनता है !
7.सातवां घर पत्नीv का अथवा पति का होता है जातक के सातवे घर मे अगर शुक्र बैठा हो तो ये बेहद शुभ माना जाता है, कहा जाता है शुक्र ग्रह सातवे घर मे हो तब अच्छी जीवन साथ का चयन होता है तहा धर्मपरायान होती है साथ साथ सद्गुणों की मालकिन होती है और अपने पति के लिए तत्पर होती है !
8 अठवा घर बिलकुल अच्छा नहीं मना गया है , यहाँ शुक्र ग्रह की उपस्थिति भी अच्छी नहीं होती है, ऐसा होने पर जातक अथवा जातिका का विवाह देर से होता है, था जीवन व थोड़ा कस्टकारी होता है, अठवा घर ससुराल पक्छ का होता है इसलिए जातक को शादी होने मे दिक्कते अति है
ग्रह को सांत करने के उपाय : इस घर को सांत करने के लिए माता संतोषी की नियमित पाठ पूजा तथा व्रत का विशेष महत्व है, ऐसा करने से उस घर की पीड़ा समाप्त होती है तथा शादी मे आने वाली दिकत्ते दूर होती है, एवं शुक्रवार को सफ़ेद कपडे पहने मीठा खाये तथा गरीबो को मीठा दान करे !!
9.नाउँमा घर बेहद शुभ होता है और अगर इस घर मे शुक्र ग्रह बिराजमान हो जाये ती इसकी शुभता और बढ़ जाती है, ऐसे जातको का भाग्योदय उसके जीवनसाथी के मिलने के बाद होती है , अर्थात वही सहारा बनता है !!
10. दसवे घर मे शुक्र ग्रह की इस्तिथि ना तो बहुत अच्छी होती है और ना ही बहुत बुरी, परन्तु शनि के साथ इस ग्रह की बिलकुल नहीं बनती !!
11.ग्यारवा भाव भी सनी देवता का भाव है जिसकारण यहाँ भी शुक्र की उपस्थिति अच्छी नहीं मानी गयी है !!
12 बारहवा भाव शुक्र ग्रह के लिए बेहद शुभकारक होता है वैसे तो ये मोक्छ का घर है और शुक्र ग्रह कामुकता को व दर्शाता है, जिसकारण इस घर मे शुक्र की इस्थिति यह बताती है की जातक अपने आप पर काबू पर चूका है jis कारण बारहवे घर से उसे शुभता ही शुभता प्राप्त होती है, यह घर शुक्र के सभी सुख को जातक को दिलवाता है !!