नवम भाव गुरु का भाव है साथ साथ यह धर्म और भाग्य का भाव भी होता है, चुकी शुक्र सभी सुख दाता है अतः वाह इस भाव मे राजसिक सुख वैभव देता है, इस भाव वाले जातक जन्म के बाद पिता को पैसे का अभाव नहीं होने देते, पैसे चाहे जैसे भी आये मगर आते है, ऐसे जातक बैंकिंग मे ज्यादा योगदान देते है, क्युकी बैंक पैसे से सम्बंधित उद्योग है, कुल मिलाकर यहाँ शुक्र विराजमान होने पर लक्ष्मी देवी की बिशेष कृपा प्राप्त होती है,
शुक्र नवम भाव मे होने पर जातक की वर अथवा वधु कुल की शोभा बढ़ाने वाले अर्थात अति सुन्दर और धार्मिक होते है, शादी के बाद ऐसे जातको के धन् बढ़ते ही रहते है !””
अगर शुक्र के साथ किसी पाप गृह का प्रभाव हो तो जातक बुरी संगत से लीप्त होने की आशंका होती है,, तथा शुक्र पाप ग्रह से लीप्त होकर शुभ फल मे कमी ले आता है, ” |
शुक्र नवम मे उपस्थित होकर जातक को धन् के प्रति आकर्षित करती है, धन् के अलावा दूसरा कुछ रास नहीं आता, यहीं कारण है की जातक निरंतर प्रयासरत रहता है और अधिक धन् पाने की, और उसकी रक्षा हेतु धार्मिक कार्यों मे संलग्न रहता है, “ऐसा भी कहा जाता है की ऐसे जातक पूजा पाठ धनवान होने की अभिलाषा से करता है,
यहाँ शुक्र विराजमान होने के कारण यह अपनी माता को गुप्त रोग तथा पिता को मोटापा उपहार मे देता है, !