दशवे भाव का शुक्र माता अथवा पत्नी द्वारा शासित मना जाता है, इनके कार्य भी ज्यादातर स्त्री वर्ग से जुड़े होते है, जैसे साज श्रृंगार या घर ग्रहस्थी से जुडा कोई काम ही करते है, !!
ऐसे जातक का पिता आरामतलब होता है, जिसकारण माता ही घर का संचालन का करती है,, जातक के पास बहुत सारी आजीवकाये होती है, अक्सर देखा जाता है की इनकी दो शादिया होती है, और गृहस्त जीवन मे सुख की थोड़ी कामी भी पायी जाती है “
जातक के पास काम ही काम होने के कारण उसके जीवन को उलझाए रखता है, ऐसे जातक कमाए हुए धन् को ब्यर्थ के काम अर्थात शनि से जुड़े कामों मे खर्च करते है,,,
इस प्रकार के जातक दुसरो के कार्य मे साधन जुटाने का कार्य करते है,, “”तथा इनके मालिक स्त्री जाती की हो होती है,, किसी ना किसी तरीके से ये घर की साज सज्जा का ही कार्य करते है जैसे – घरों मे पत्थर लगाना, कढ़ाई, या काशिद दारी इत्यादि वाले कार्य करते है |””