शुक्र बारहवें घर मे

इस भाव मे शुक्र सबसे ज्यादा सुखो को देने वाला होता है, अगर किसी जातक का शुक्र बारहवें भाव मे हो तब उसके पास एक ना एक दिन सारे सुख वैभव, वाहन तथा अचल सम्पति प्राप्त होती है,,

शुक्र, वाहन, धन्, सम्पति ऐश्वर्य, भोग विलासिता का ग्रह माना गया है, जातक शुक्र की महादशा, तथा अन्तर्दशा मे बिशेष प्रकार के सुख पाता है, बारहवें भाव का शुक्र विवाह्परान्त जातक के भाग्य उत्थान के लिए जाना जाता है, “|

चुकी बारहवा भाव दुख द्वेष इत्यादि से सम्बन्ध रखता है, औऱ शुक्र दैत्य ग्रह होने के कारण जातक को अत्यधिक महत्वकांछी बना देता है, तथा मन की संतुस्टी मे कमी लाता है |

शुक्र बारहवें भाव मे बैठकर राजयोग निर्माण करता है, जो ज्योतिष विद्या मे महत्वपूर्ण स्थिति बताई जाती है |

शुक्र के अलावा यहाँ बाकि ग्रह अशुभ फल देते है, शुक्र औऱ बारहवें भाव का यह सम्बन्ध काफी बिशेष उपलब्धि यो वाला होता है |

नोट :शुक्र के साथ मंगल की युति दोषपूर्ण मानी जाती है, अगर बारहवें भाव मे शुक्र के साथ मंगल या केतु विराजमान हो तो शुक्र अपनी सुखो मे कमी ले आता है, इस दोष को दुर् करने के लिए हनुमान चालीसा तथा बजरंग बान विधिपूर्वक पढ़े |

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